॥ ॐ नमः शिवाय त्र्यम्बकेश्वराय ॥

त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग

त्रिमुख ज्योतिर्लिंग · गोदावरी का उद्गम।

त्रिमुख शिव — द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अष्टम। एकमात्र ज्योतिर्लिंग जिसके लिंग के तीन मुख हैं — ब्रह्मा, विष्णु और महेश — पावन गोदावरी के उद्गम पर, ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में। चार कुंभ (सिंहस्थ) स्थलों में से एक। दर्शन, कालसर्प शांति पूजा, आवास और यात्रा — सब धार्मिक वाइब्स द्वारा सम्पूर्ण रूप से व्यवस्थित।

त्रिमुख लिंग गोदावरी का उद्गम कालसर्प शांति पूजा वरिष्ठ एवं प्रवासी अनुकूल
8
वाँ ज्योतिर्लिंग
3
लिंग के मुख
~50L
श्रद्धालु / वर्ष

अष्टम ज्योतिर्लिंग

नदी के उद्गम पर त्रिनेत्रधारी प्रभु

अधिष्ठाता देव: भगवान शिव त्र्यम्बकेश्वर रूप में — ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिमूर्ति) का प्रतीक अद्वितीय त्रिमुख लिंग, माता पार्वती के साथ पूजित।

ॐ नमः शिवाय त्र्यम्बकेश्वराय

त्र्यम्बकेश्वर अष्टम ज्योतिर्लिंग है और अपने त्रिमुख लिंग के लिए अद्वितीय है, जो हिंदू त्रिमूर्ति — सृष्टिकर्ता ब्रह्मा, पालक विष्णु और संहारक महेश (शिव) — का प्रतीक है। लिंग एक छोटे गड्ढे में स्थित है, जिस पर प्राकृतिक झरने से जल टपकता रहता है। शिव पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार ऋषि गौतम और उनकी पत्नी अहल्या के कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहाँ प्रकट हुए, और गौतम को पाप से मुक्त करने हेतु अपनी जटाओं से गोदावरी — “दक्षिण गंगा” — का अवतरण कराया। त्र्यम्बकेश्वर भारत का एकमात्र स्थान है जहाँ कालसर्प शांति, नारायण नागबलि और त्रिपिंडी श्राद्ध के कर्मकाण्ड प्रामाणिक रूप से सम्पन्न होते हैं।

अद्वितीय लिंग

तीन मुख — ब्रह्मा, विष्णु, महेश

पवित्र नदी

गोदावरी का उद्गम (दक्षिण गंगा)

विशेष पूजा

कालसर्प एवं नारायण नागबलि का एकमात्र स्थल

स्थान

त्र्यम्बक, नाशिक से ३० किमी

इतिहास एवं विरासत

काले बेसाल्ट में पेशवा-कालीन उत्कृष्ट कृति

वर्तमान मंदिर १८वीं शताब्दी की उत्कृष्ट कृति है, जिसे मराठा साम्राज्य के पेशवा बालाजी बाजीराव (नाना साहेब) ने बनवाया। हेमाडपन्थी शैली में काले बेसाल्ट से लगभग तीन दशकों में निर्मित, इसके प्रांगण और शिखर पर पेशवा-युग की सर्वोत्तम पाषाण-शिल्प — देवता, ऋषि, पशु और दिव्य प्राणी असाधारण बारीकी से उत्कीर्ण हैं। स्थल का मूल कहीं अधिक प्राचीन है, परम्परा से पांडवों और ऋषि गौतम की तपस्या द्वारा गोदावरी के अवतरण से जुड़ा।

नगर के ऊपर ब्रह्मगिरि उठता है, जिसे गोदावरी का भौतिक उद्गम माना जाता है; नदी पहले पर्वत पर गंगाद्वार मंदिर में और मंदिर के निकट कुशावर्त कुण्ड में प्रकट होती है, जहाँ श्रद्धालु दर्शन से पूर्व स्नान करते हैं। त्र्यम्बकेश्वर चार कुंभ मेला (सिंहस्थ) स्थलों में से एक है — प्रत्येक बारह वर्ष पर नाशिक–त्र्यम्बक सिंहस्थ कुशावर्त और रामकुंड पर शाही स्नान हेतु लाखों को आकर्षित करता है, अगला महामेला २०२७ चक्र में। नगर नाथ संत निवृत्तिनाथ — संत ज्ञानेश्वर के बड़े भाई — का समाधि-स्थल भी है, जिनकी वार्षिक पालखी यात्रा एक प्रमुख क्षेत्रीय तीर्थयात्रा है।

पेशवा-युग · १८वीं सदीकाला बेसाल्ट हेमाडपन्थी शिल्पकुंभ / सिंहस्थ स्थल · अगला २०२७गोदावरी का उद्गम · ब्रह्मगिरि

दर्शन एवं अनुष्ठान

आरती एवं दर्शन समय

दर्शन के समय श्रद्धालु लिंग पर रखा चाँदी का मुकुट देखते हैं; तीन मुख केवल पंडित प्रत्यक्ष देखते हैं, और लिंग स्वयं जनता को केवल विशेष अवसरों पर दिखाया जाता है। यहाँ नित्य दिनचर्या है।

दर्शन

मंगला आरती5:30 AM
प्रातः दर्शन5:30 AM – 12:00 PM
संध्या दर्शन5:00 PM – 9:00 PM
शयन आरती9:00 PM

समय सांकेतिक हैं और त्योहारों, सिंहस्थ तथा मंदिर सूचनाओं के साथ बदलते हैं। कालसर्प शांति और नारायण नागबलि जैसी विशेष पूजाएँ निश्चित तिथियों पर होती हैं और पूर्व पंडित-परामर्श चाहिए। यात्रा से पूर्व अवश्य पुष्टि करें — हमें संदेश करें, हम आपकी तिथियों हेतु नवीनतम कार्यक्रम और पूजा-मुहूर्त साझा करेंगे।

वस्त्र-संहिता एवं आवश्यक सामान

त्र्यम्बकेश्वर सभी ज्योतिर्लिंगों में सबसे कठोर वस्त्र-संहिता लागू करता है, विशेषकर गर्भगृह हेतु। पूजा या निकट-दर्शन करने वाले पुरुषों को केवल धोती और उत्तरीय पहनना होता है — पतलून, जींस या पाश्चात्य वस्त्र नहीं। महिलाओं को साड़ी (पारम्परिक नौ-गज महाराष्ट्रीय साड़ी श्रेष्ठ) या सलवार-कमीज़ पहननी चाहिए। धोती और उत्तरीय मंदिर के निकट किराए पर उपलब्ध हैं। प्रवेश से पूर्व मोबाइल और कैमरे लॉकर में जमा करने होते हैं।

त्योहार एवं विशेष दिन

त्र्यम्बकेश्वर का पावन पंचांग

रात्रि-पर्यंत महाशिवरात्रि अभिषेक से लेकर बारह-वर्षीय सिंहस्थ कुंभ तक, त्र्यम्बकेश्वर का पंचांग सभी ज्योतिर्लिंगों में सबसे समृद्ध है।

Maha festivals2 dates
  • February – Marchमहाशिवरात्रि सर्वाधिक भव्य उत्सव — रात्रि-पर्यंत दर्शन और त्रिमुख लिंग का विशेष अभिषेक।
  • Every 12 years · next 2027 cycleनाशिक–त्र्यम्बक सिंहस्थ कुंभ चार कुंभ स्थलों में से एक; कुशावर्त और रामकुंड पर शाही स्नान लाखों को आकर्षित करता है।
Local festivals1 dates
  • Margashirsha · Decemberनिवृत्तिनाथ यात्रा नाथ संत निवृत्तिनाथ के सम्मान में पालखी यात्रा, जिनकी समाधि त्र्यम्बक में है।
Seasonal3 dates
  • July – Augustश्रावण मास एवं ब्रह्मगिरि परिक्रमा सोमवार व्रत; तीसरे सोमवार की ब्रह्मगिरि प्रदक्षिणा (परिक्रमा) विशेष शुभ।
  • Novemberत्रिपुरी पूर्णिमा (कार्तिक पूर्णिमा) मंदिर और नगर भर में दीप-प्रज्वलित उत्सव।
  • Januaryमकर संक्रांति कुशावर्त कुण्ड में पवित्र स्नान, गोदावरी का उद्गम-स्थल।

कुछ स्नान की चंद्र तिथियाँ समय निकट आने पर पुष्टि की जाती हैं। नवीनतम कार्यक्रम हेतु हमें संदेश करें।

दिव्य यात्रा, व्यवस्थित

धार्मिक वाइब्स आपका दर्शन कैसे व्यवस्थित करता है

न ऑनलाइन भुगतान, न अव्यवस्था। अपनी तिथियाँ बताएँ और एक वास्तविक समन्वयक आपकी त्र्यम्बकेश्वर यात्रा का हर भाग व्यवस्थित करेगा — कठोर वस्त्र-संहिता, कुशावर्त स्नान और विशेष पूजाओं सहित — सत्यापित स्थानीय पंडितों एवं भागीदारों के द्वारा। इस पृष्ठ पर कोई मूल्य नहीं; सब कुछ व्हाट्सएप पर पारदर्शी रूप से बताया जाता है।

दर्शन एवं अभिषेक

संकल्प, अभिषेक और वस्त्र-संहिता व्यवस्था हेतु पंडित सहायता के साथ सुगम दर्शन।

कालसर्प एवं नागबलि पूजा

पंजीकृत मंदिर पंडितों के साथ सही तिथि पर प्रामाणिक कालसर्प शांति, नारायण नागबलि और त्रिपिंडी श्राद्ध।

आवास एवं धर्मशालाएँ

मंदिर ट्रस्ट धर्मशाला, MTDC हॉलिडे रिसॉर्ट और त्र्यम्बक नगर एवं नाशिक में सत्यापित आवास।

यात्रा एवं स्थानांतरण

नाशिक रोड स्टेशन (३० किमी), ओज़र हवाई अड्डा और मुंबई से स्थानांतरण, साथ ही ब्रह्मगिरि और पंचवटी भ्रमण।

सत्यापित मार्गदर्शक एवं पंडित

गोदावरी कथा, ब्रह्मगिरि परिक्रमा और पंचवटी रामायण स्थलों हेतु स्थानीय मार्गदर्शक और पंडित।

वरिष्ठ, प्रवासी एवं एकल-महिला देखभाल

धीमी गति, पंक्ति-सहायता, सम्पूर्ण यात्रा में समन्वयक और प्रवासी परिवारों हेतु समय-क्षेत्र अनुकूल नियोजन।

पारितंत्र का अंग

धार्मिक वाइब्स नेटवर्क

धार्मिक वाइब्स का एक केंद्र — भारत का आध्यात्मिक-तकनीक पारितंत्र जो श्रद्धालुओं को पवित्र भारत से जोड़ता है।

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अपनी यात्रा से जुड़े रहें — धार्मिक वाइब्स ऐप-परिवार डाउनलोड करें।

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अपनी त्र्यम्बकेश्वर यात्रा नियोजित करें

हमें अपनी तिथियाँ, श्रद्धालुओं की संख्या और कालसर्प शांति या नागबलि पूजा की आवश्यकता बताएँ — हमारे समन्वयक दर्शन, पूजा, आवास, यात्रा और मार्गदर्शक व्यवस्थित करेंगे। हम मनुष्य हैं, कोई बुकिंग बॉट नहीं। इस साइट पर न ऑनलाइन भुगतान है, न मूल्य।

जानने योग्य

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्र्यम्बकेश्वर में दर्शन एवं आरती के समय क्या हैं?
मंगला आरती प्रातः ५:३० बजे। प्रातः दर्शन ५:३० से दोपहर १२:०० तक, संध्या दर्शन ५:०० से रात्रि ९:०० तक, और शयन आरती ९:०० बजे। दर्शन के समय लिंग चाँदी के मुकुट से ढका रहता है; तीन मुख केवल विशेष अवसरों पर दिखाए जाते हैं। समय त्योहारों और सिंहस्थ में बदलते हैं।
त्र्यम्बकेश्वर में वस्त्र-संहिता क्या है?
यह ज्योतिर्लिंगों में सबसे कठोर वस्त्र-संहिता है। पूजा या निकट-दर्शन करने वाले पुरुषों को केवल धोती और उत्तरीय पहनना होता है — पतलून, जींस या पाश्चात्य वस्त्र नहीं। महिलाओं को साड़ी (नौ-गज महाराष्ट्रीय साड़ी श्रेष्ठ) या सलवार-कमीज़ पहननी चाहिए। धोती-उत्तरीय मंदिर के निकट किराए पर उपलब्ध, और फोन लॉकर में जमा करने होते हैं।
कालसर्प शांति पूजा क्या है और त्र्यम्बकेश्वर इसके लिए विशेष क्यों है?
त्र्यम्बकेश्वर भारत में कालसर्प शांति (जन्म-कुंडली के कालसर्प दोष का उपाय), नारायण नागबलि और त्रिपिंडी श्राद्ध का एकमात्र प्रामाणिक स्थल है। ये पंजीकृत मंदिर पंडितों द्वारा निश्चित तिथियों पर किए जाते हैं और पूर्व परामर्श चाहिए। हम आपके लिए सही मुहूर्त और सत्यापित पंडित व्यवस्थित कर सकते हैं।
त्र्यम्बकेश्वर कैसे पहुँचें?
त्र्यम्बक नाशिक से लगभग ३० किमी है। निकटतम रेलवे नाशिक रोड जंक्शन (३० किमी) और निकटतम हवाई अड्डा नाशिक ओज़र (३८ किमी) है, मुंबई (१७५ किमी) एक सामान्य प्रवेश-द्वार है। सड़क पूर्णतः मोटर-योग्य और वरिष्ठों हेतु अच्छी है। हम नाशिक, हवाई अड्डे और मुंबई से स्थानांतरण व्यवस्थित करते हैं।
क्या धार्मिक वाइब्स वरिष्ठ नागरिकों और प्रवासी परिवारों की सहायता कर सकता है?
हाँ। हम धीमी गति, पंक्ति एवं वस्त्र-संहिता सहायता, सम्पूर्ण समन्वयक, सत्यापित स्वच्छ आवास, दर्शन एवं विशेष पूजाओं हेतु पंडित सहायता, और प्रवासी परिवारों हेतु समय-क्षेत्र अनुकूल नियोजन व्यवस्थित करते हैं। बस +९१ ९२२०३ ५२२४४ पर व्हाट्सएप करें।
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